भ्रष्टाचार का ऐसा खुलासा जिसने दिल्ली से लेकर राजस्थान तक मचा दी हलचल! सेना के नाम पर मांगी जमीन औने-पौने में निजी हाथों में कैसे पहुंची? पूरा मामला पढ़ें…
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📌 बड़ा खुलासा: बस्सी की 80 बीघा जमीन पर विवाद गहराया
जयपुर/दिल्ली — राजस्थान के बस्सी क्षेत्र की करीब 80 बीघा मूल्यवान जमीन के आवंटन को लेकर बड़ा विवाद खड़ा हो गया है। आरोप है कि यह जमीन सेना की कमांड कोर के निर्माण के लिए मांगी गई थी, लेकिन उसे “राइजिंग राजस्थान” के नाम पर कानपुर की एक निजी कंपनी को बेहद कम कीमत पर दे दिया गया।
सूत्रों के मुताबिक, जमीन आवंटन का प्रस्ताव जब ऊपर पहुंचा तो अधिकारियों ने “गंभीर अनियमितताओं” का हवाला देते हुए आपत्ति जताई। यही वजह है कि मामला दिल्ली तक पहुंच गया और अब केंद्र स्तर पर इसकी जांच की मांग उठ रही है।
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📌 क्या है पूरा मामला?
सेना ने अपने कमांड कोर के विस्तार और नई सुविधाएं विकसित करने के लिए राजस्थान सरकार से जमीन मांगी।
आरोप है कि इसी प्रक्रिया के दौरान बस्सी की कीमती जमीन को “राइजिंग राजस्थान प्रोजेक्ट” के नाम पर औने-पौने दाम में एक बाहरी कंपनी को दे दिया गया।
बताया जाता है कि जमीन आवंटन से जुड़े दस्तावेजों में बाजार मूल्य की तुलना में जमीन का मूल्यांकन बेहद कम दिखाया गया, जिससे सरकार को बड़े पैमाने पर नुकसान हुआ।
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📌 स्थानीय लोगों की नाराज़गी
ग्रामीणों और स्थानीय संगठनों का आरोप है कि—
जमीन किसानों और गांव के हितों को नज़रअंदाज़ कर दी गई
आवंटन प्रक्रिया में पारदर्शिता नहीं रही
परियोजना में स्थानीय लोगों को रोजगार देने के दावे ज़मीनी स्तर पर पूरी तरह विफल रहे
लोगों का कहना है कि करोड़ों की जमीन को कुछ लाख में ट्रांसफर कर दिया गया, जबकि सामान्य प्रक्रिया में ऐसे मामलों की उच्च-स्तरीय समीक्षा होती है।
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📌 सवालों के घेरे में सरकारी अधिकारी
सूत्रों का दावा है कि—
राइजिंग राजस्थान योजना के तहत 35 लाख वर्गफुट जमीन देने की प्रक्रिया में कई अनियमितताएँ हुईं
फाइलों में संशोधन और मूल्यांकन प्रक्रिया पर गंभीर सवाल उठे हैं
युवाओं को रोजगार देने के नाम पर किए गए वादे पूरे नहीं हुए
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📌 अब आगे क्या?
यह मामला तेजी से राजनीतिक रंग पकड़ रहा है।
दिल्ली से लेकर जयपुर तक अधिकारियों से रिपोर्ट मांगी गई है।
अगर आरोप साबित होते हैं तो
जमीन आवंटन रद्द होने और दोषियों पर कार्रवाई की संभावना है।












