ऑपरेशन ‘धरा-ग्रीका’: ANTF ने 25 हजार इनामी अंतरराज्यीय तस्कर को 11 साल बाद दबोचा

राजस्थान एंटी नारकोटिक्स टास्क फोर्स (ANTF) को एक बड़ी सफलता मिली है। टीम ने ऑपरेशन ‘धरा–गुरिड़का’ के तहत 11 वर्षों से फरार चल रहे अंतरराज्यीय नशा तस्कर को गिरफ्तार किया है, जिस पर 25,000 रुपये का इनाम घोषित था। आरोपी पंजाब, राजस्थान, गुजरात और मध्यप्रदेश के तस्करों से जुड़ा हुआ था और पिछले चार मुकदमों में वांछित था।

 

गिरफ्तार आरोपी की पहचान “केलाशा” (नाम दस्तावेज़ अनुसार) के रूप में हुई। वह पिछले कई वर्षों से तस्करी में सक्रिय था और लगातार अपना ठिकाना बदलकर पुलिस को चकमा देता आ रहा था।

कैसे करता था तस्करी?

 

● आरोपी खुद खेती नहीं करता था और न ही वह नशे की खेप सीधे उत्पादकों से लाता था।

● वह छोटे-छोटे किसानों और स्थानीय उत्पादकों से कम दाम पर खेप खरीदकर बड़े तस्करों तक सप्लाई कर देता था।

● इन तस्करों से एक खेप में उसे 40,000 से 50,000 रुपये तक का कमीशन मिलता था।

● हर महीने 3–4 खेप डील कर वह लाखों रुपये की कमाई कर लेता था।

● आरोपी अपने लेन-देन में बेहद सतर्क रहता था और कभी एक गाड़ी में बड़ी मात्रा में माल नहीं रखता था।

● पुलिस को धोखा देने के लिए वह माल को छोटे-छोटे पैकेट्स में बांटकर वाहनों में अलग-अलग हिस्सों में छिपाता था।

● अपराधी इतना शांत और सीक्रेट तरीके से काम करता था कि 11 साल में केवल चार ही मुकदमे दर्ज हो पाए।

 

 

—चार दिन काम, फिर ऐशोआराम

 

दस्तावेजों के अनुसार आरोपी महीने में केवल चार दिन तस्करी का काम करता था।

उसके बाद वह गांव में आराम की जिंदगी व्यतीत करता था।

इसी सिलसिले और सावधानी के कारण पुलिस उसे पकड़ नहीं पा रही थी।

अपराधी के काले कारनामे

 

● आरोपी की शुरुआत 2014 में अवैध डोडा–पोस्त से हुई।

● वह धीरे-धीरे बड़े तस्करों के संपर्क में आया और खेपें सप्लाई करने लगा।

● 2019 में एक तस्कर के साथ मिलकर उसने बड़ी मात्रा में डोडा पोस्त की सप्लाई की, जिसके चलते उसके खिलाफ पुलिस कार्रवाई शुरू हो गई।

● इसके बाद वह पुलिस की पकड़ से बचने के लिए लगातार राज्य और जिला बदलता रहा।

● उसके खिलाफ 2022 में भी मामलों में वांछित होने की पुष्टि हुई।

● वह जोधपुर में नशे की खेप ले जाते समय एक बार फिर पुलिस की नजर में आया लेकिन उस समय भी फरार होने में सफल रहा।

कैसे पकड़ा गया आरोपी?

 

● ANTF टीम कई महीनों से आरोपी की कुंडली खंगाल रही थी।

● आरोपी फोन का उपयोग कम करता था और अपना ठिकाना अक्सर बदलता रहता था।

● टीम ने उसके गांव, परिवार और रिश्तेदारों की जानकारी निकालकर विशेष निगरानी बढ़ाई।

● आरोपी दो अलग-अलग स्थानों पर वोटर सूची में दर्ज था—जिससे उसकी गतिविधियों का पता चला।

● ANTF की टीम ने सूक्ष्म जानकारी के आधार पर उसे घेराबंदी कर दबोच लिया।

 

गिरफ्तारी के दौरान आरोपी ने टीम को अपना सही नाम बताने से भी बचने की कोशिश की, लेकिन ANTF के अधिकारियों ने उसकी पहचान की पुष्टि कर ली।ऑपरेशन का नाम ‘धरा–गुरिड़का’ क्यों रखा गया?

 

● नशे की पर्यायवाची ‘गुरिड़का’ और पृथ्वी की पर्यायवाची ‘धरा’ शब्द को मिलाकर इस ऑपरेशन का नाम “धरा–गुरिड़का” रखा गया।

● आरोपी नशे की धरातल स्तर पर डीलिंग करता था और उत्पादकों व उपभोक्ताओं के बीच कड़ी का काम करता था।

● इसी आधार पर ऑपरेशन का यह नाम निर्धारित किया गया।

टीम को मिलेगा सम्मान

 

पुलिस महानिदेशक श्री विकास कुमार ने इस कार्रवाई में शामिल सभी अधिकारियों और जवानों की प्र

शंसा की और बताया कि टीम को विशेष समारोह में सम्मानित किया जाएगा।

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Vikas Kumar
Author: Vikas Kumar

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“नशे के सौदागरों पर ANTF ने एकसाथ ऐसा शिकंजा कसा कि चार जिलों में हड़कंप मच गया। जालोर से उदयपुर, कोटा से राजसमंद तक चली ताबड़तोड़ कार्रवाइयों में करोड़ों का मादक पदार्थ जब्त हुआ और तस्करी का संगठित नेटवर्क बेनकाब हो गया।”