देशभर में अरावली पर्वत को लेकर बहस तेज हो गई है। दरअसल, एक नया फॉर्मूला चर्चा में है, जिसके तहत 100 मीटर से कम ऊंचाई वाली पहाड़ियों को अरावली पर्वतमाला के दायरे से बाहर रखने की पैरवी की जा रही है। इस प्रस्ताव ने पर्यावरणविदों, भूगोल विशेषज्ञों और नीति-निर्माताओं के बीच चिंता बढ़ा दी है। ऐसे समय में यह जानना ज़रूरी हो जाता है कि अरावली पर्वतमाला आखिर किन-किन राज्यों से होकर गुजरती है और इसका 250 करोड़ साल पुराना इतिहास क्या कहता है।
राजस्थान की पहचान और उत्तर भारत की ‘लाइफ-लाइन’ कही जाने वाली अरावली पर्वतमाला आज अपने सबसे बुरे दौर से गुजर रही है। यह सिर्फ पहाड़ियों की एक श्रृंखला नहीं, बल्कि भारत के उस गौरवशाली भौगोलिक इतिहास की साक्षी है, जो हिमालय से भी करोड़ों वर्ष पुराना है। जानकारों के अनुसार, जब गंगा का अस्तित्व भी नहीं था और हिमालय जैसी पर्वत श्रृंखलाओं का जन्म नहीं हुआ था, तब से अरावली थार रेगिस्तान के विस्तार को रोकने में ढाल बनकर खड़ी है।
अरावली किन-किन राज्यों में फैली है?
अरावली पर्वतमाला भारत की सबसे पुरानी पर्वत श्रृंखला मानी जाती है, जो उत्तर-पश्चिम भारत में फैली हुई है। इसका विस्तार मुख्य रूप से चार राज्यों में माना जाता है—
गुजरात – अरावली का दक्षिणी सिरा गुजरात के पालनपुर क्षेत्र से शुरू होता है।
राजस्थान – अरावली का सबसे बड़ा और प्रमुख हिस्सा राजस्थान में है। माउंट आबू, गुरु शिखर (1,722 मीटर) अरावली की सर्वोच्च चोटी यहीं स्थित है।
हरियाणा – अलवर से निकलकर अरावली हरियाणा के फरीदाबाद, गुरुग्राम और मेवात (नूंह) क्षेत्र तक फैली है।
दिल्ली (NCT) – अरावली की अंतिम श्रृंखला दिल्ली के रिज क्षेत्र में दिखाई देती है, जो राजधानी के पर्यावरण संतुलन के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण है।
करीब 800 किलोमीटर लंबी अरावली पर्वतमाला गुजरात से शुरू होकर दिल्ली तक फैली हुई है।
250 करोड़ साल पुरानी अरावली का इतिहास
भूवैज्ञानिकों के अनुसार, अरावली पर्वतमाला की आयु लगभग 2.5 अरब (250 करोड़) वर्ष है। यह पर्वतमाला प्रीकैम्ब्रियन युग की मानी जाती है, जब पृथ्वी की सतह का निर्माण प्रारंभिक अवस्था में था। समय के साथ भारी कटाव (erosion) के कारण अरावली की ऊंचाई कम होती गई, लेकिन इसका भौगोलिक और पर्यावरणीय महत्व आज भी उतना ही बड़ा है।
अरावली ने—
थार रेगिस्तान को उत्तर और पूर्व भारत की ओर बढ़ने से रोका
भूजल रिचार्ज में अहम भूमिका निभाई
उत्तर भारत की जलवायु को संतुलित बनाए रखा
वन्यजीव और जैव विविधता को संरक्षण दिया
अरावली क्यों चर्चा में है?
अरावली इन दिनों एक नए विवाद के कारण सुर्खियों में है। हाल ही में प्रस्ताव सामने आया है कि 100 मीटर से कम ऊंचाई वाली पहाड़ियों को अरावली की श्रेणी से बाहर किया जाए। विशेषज्ञों का मानना है कि यदि ऐसा हुआ, तो—
बड़े पैमाने पर खनन और निर्माण को वैधता मिल जाएगी
हरियाणा, राजस्थान और दिल्ली के पर्यावरण पर गंभीर असर पड़ेगा
भूजल स्तर और वायु गुणवत्ता और अधिक बिगड़ेगी
- पर्यावरणविद चेतावनी दे रहे हैं कि अरावली को सिर्फ ऊंचाई के आधार पर परिभाषित करना, इसके ऐतिहासिक और प्राकृतिक अस्तित्व के साथ अन्याय












