बाड़मेर/बालोतरा।
राज्य में जिलों के पुनर्सीमांकन का असर अब केवल प्रशासनिक ढांचे तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि यह आगामी विधानसभा परिसीमन का भी आधार बन सकता है। राजनीतिक जानकारों का मानना है कि नए जिलों और उपखंडों की सीमाएं भविष्य में विधानसभा क्षेत्रों के गठन की दिशा तय करेंगी।
जानकारों के अनुसार, विधानसभा परिसीमन के दौरान बालोतरा में गिड़ा–पाटोदी और अन्य क्षेत्रों को शामिल कर एक नई विधानसभा के सृजन की संभावना बन रही है। वहीं सिणधरी और धोरीमन्ना को मिलाकर गुड़ामालानी विधानसभा का नया स्वरूप तैयार किया जा सकता है। उल्लेखनीय है कि भाजपा संगठनात्मक दृष्टि से पहले से ही बालोतरा जिले में गुड़ामालानी और धोरीमन्ना को एक इकाई मानकर चलती रही है और अब जिला पुनर्गठन भी उसी रणनीति के अनुरूप किया गया है।
बाड़मेर जिले में 7 उपखंड
पुनर्सीमांकन के बाद बाड़मेर जिले में अब 7 उपखंड और 11 तहसील हो गई हैं।
बाड़मेर जिले में शामिल उपखंड हैं—
बाड़मेर, गडरा रोड, चौहटन, रामसर, बायतु, सेडवा और शिव।
बालोतरा जिले में 5 उपखंड
नवगठित बालोतरा जिले में 5 उपखंड और 9 तहसील शामिल की गई हैं।
इनमें—
बालोतरा, सिणधरी, सिवाना, धोरीमन्ना और गुड़ामालानी उपखंड शामिल हैं।
राजनीतिक नफे-नुकसान पर भी चर्चा
जिलों की सीमाओं में बदलाव को लेकर सियासी चर्चाएं भी तेज हैं। इसे मौजूदा सरकार में मंत्री केके विश्नोई के राजनीतिक नफे-नुकसान से जोड़कर देखा जा रहा है। वहीं बायतु को दोबारा बाड़मेर जिले में शामिल करना, बायतु क्षेत्र में प्रभाव रखने वाले वरिष्ठ नेता हरीश चौधरी को राजनीतिक रूप से कमजोर करने की कोशिश के तौर पर भी देखा जा रहा है।
आदेश जारी होने के बाद विधायक हरीश चौधरी ने प्रतिक्रिया देते हुए लिखा—
“तुम इधर भेजो मुझे, तुम उधर भेजो मुझे,
नक्शों से खेलकर चाहे जिधर भेजो मुझे।
सीमाएं बदलने से न डरूंगा, न झुकूंगा।”












