संभल।
संभल में जामा मस्जिद सर्वे के दौरान हुई हिंसा मामले में बड़ा कानूनी मोड़ आ गया है। मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट विभांशु सुधीर की अदालत ने तत्कालीन सीओ संभल अनुज चौधरी, इंस्पेक्टर अनुज तोमर समेत 12 पुलिसकर्मियों के खिलाफ एफआईआर दर्ज करने के आदेश दिए हैं। यह आदेश 9 जनवरी 2026 को पारित किया गया, जिसकी जानकारी मंगलवार को सामने आई।
यह मामला नखासा थाना क्षेत्र के मोहल्ला खग्गू सराय अंजुमन निवासी यामीन की ओर से दायर याचिका से जुड़ा है। यामीन ने 6 फरवरी 2024 को अदालत में याचिका दाखिल कर आरोप लगाया था कि उनका 24 वर्षीय बेटा आलम 24 नवंबर 2024 को रस्क (टोस्ट) बेचने के लिए घर से निकला था। इसी दौरान वह शाही जामा मस्जिद इलाके में पहुंच गया, जहां हिंसा की स्थिति बनी हुई थी।
याचिका में आरोप है कि पुलिस द्वारा की गई फायरिंग के दौरान आलम को गोली लग गई, जिससे वह गंभीर रूप से घायल हो गया। पीड़ित परिवार का कहना है कि उनका बेटा किसी हिंसक गतिविधि में शामिल नहीं था और रोज़ी-रोटी के लिए सामान बेचने निकला था। इसके बावजूद उसे गोली मारी गई।
अदालत ने प्रथम दृष्टया मामले को गंभीर मानते हुए पुलिस अधिकारियों की भूमिका की जांच के आदेश दिए और संबंधित पुलिसकर्मियों पर एफआईआर दर्ज करने का निर्देश दिया। इस फैसले के बाद संभल हिंसा के दौरान पुलिस कार्रवाई पर सवाल खड़े हो गए हैं और मामले ने तूल पकड़ लिया है।
अब इस आदेश के बाद पुलिस अधिकारियों के खिलाफ कानूनी कार्रवाई की प्रक्रिया शुरू होगी। वहीं, पीड़ित परिवार ने अदालत के फैसले को न्याय की दिशा में बड़ा कदम बताया है।











