IPS transfer list coming soon राजस्थान कैडर की आईपीएस ज्येष्ठा मेंत्रेई: अपराध के अंधेरे में कानून की रोशनी सिरोही से भिवाड़ी तक—जहाँ पहुँचीं खाकी की शेरनी, वहाँ टूटा अपराध का नेटवर्क*

जयपुर :- *विकास शर्मा*

भिवाड़ी जिले में अपने ही विभाग द्वारा लोकेशन ट्रेस करने के मामले में सुर्खियां में आयी राजस्थान कैडर की तेज़तर्रार आईपीएस अधिकारी ज्येष्ठा ने सिरोही और भिवाड़ी जैसे संवेदनशील जिलों में अपनी पोस्टिंग के दौरान जिस सख़्ती, रणनीति और मानवीय दृष्टिकोण का परिचय दिया, उसने उन्हें एक एक्शन-ओरिएंटेड और रिज़ल्ट-ड्रिवन अफ़सर के रूप में स्थापित किया।

वर्तमान में CID-CB में प्रभावी भूमिका निभाने के साथ-साथ वे जयपुर क्राइम ब्रांच में DCP के पद पर भी अपनी सेवाएं दे चुकी हैं। उनके इसी बहुआयामी और मजबूत ट्रैक रिकॉर्ड को देखते हुए आने वाली आईपीएस ट्रांसफर-पोस्टिंग सूची में उन्हें किसी नए और अहम जिले की कमान सौंपे जाने की प्रबल संभावना जताई जा रही है।

*IPS का अब तक़ का सफर*:-

*जयपुर क्राइम ब्रांच में दिखाई थी सख़्त पुलिसिंग*

जयपुर जैसे बड़े और चुनौतीपूर्ण शहर में क्राइम ब्रांच DCP के तौर पर ज्येष्ठा मैत्रेई ने संगठित अपराध, आदतन अपराधियों और संवेदनशील मामलों पर सख़्त रुख अपनाया।

हाई-प्रोफाइल केसों की निगरानी, इंटेलिजेंस बेस्ड कार्रवाई और त्वरित फैसलों के चलते अपराधियों में खौफ और आम जनता में सुरक्षा का भरोसा कायम हुआ।

*सिरोही में हार्डकोर अपराधियों पर निर्णायक वार*

सिरोही ज़िले में कार्यकाल के दौरान आईपीएस ज्येष्ठा मेंत्रेई ने—

लंबे समय से फरार चल रहे लूट और नकबजनी गिरोहों का पर्दाफाश किया

अंतरराज्यीय तस्करी नेटवर्क (मादक पदार्थ व अवैध हथियार) पर सटीक कार्रवाई की

आदतन अपराधियों की हिस्ट्रीशीट अपडेट कर निगरानी तंत्र मज़बूत किया

उनके नेतृत्व में पुलिस टीम ने ऐसे कई हार्डकोर अपराधियों को गिरफ्तार किया जो वर्षों से क़ानून की पकड़ से बाहर थे। सटीक इंटेलिजेंस, रातों-रात दबिश और ज़मीनी फीडबैक—यही उनकी कार्यशैली की पहचान बनी।

*भिवाड़ी में अपराध के गढ़ को बनाया कानून का किला*

औद्योगिक क्षेत्र भिवाड़ी में—

फैक्ट्री-सुरक्षा रैकेट, जबरन वसूली और संगठित चोरी पर करारा प्रहार

गैंगवार की आशंका को समय रहते प्री-एम्प्टिव एक्शन से रोका

महिलाओं के ख़िलाफ़ अपराधों में फास्ट-ट्रैक कार्रवाई और ज़ीरो टॉलरेंस नीति

भिवाड़ी जैसे जटिल शहरी-औद्योगिक क्षेत्र में उन्होंने अपराध को केवल दर्ज नहीं किया, बल्कि अपराध की जड़ तक पहुँचकर नेटवर्क तोड़ा—जो किसी भी वरिष्ठ पुलिस अधिकारी की बड़ी उपलब्धि मानी जाती है।

*सख़्ती के साथ संवेदनशीलता*

*आईपीएस ज्येष्ठा की कार्यशैली की सबसे बड़ी विशेषता रही*—

आमजन से सीधा संवाद

पीड़ित-केंद्रित पुलिसिंग

थाने को “डर का नहीं, भरोसे का केंद्र” बनाना

यही कारण है कि सिरोही और भिवाड़ी में आम नागरिक, व्यापारी वर्ग और औद्योगिक इकाइयाँ—तीनों वर्गों में उनकी कार्यशैली की खुलकर सराहना हुई।

टीम-बिल्डर अफ़सर

उन्होंने न सिर्फ़ अपराधियों पर नकेल कसी, बल्कि—

अधीनस्थ पुलिसकर्मियों को प्रोफेशनल ट्रेनिंग

तकनीक आधारित पुलिसिंग

जवाबदेही और पारदर्शिता का माहौल

तैयार किया, जिससे सिस्टम लंबे समय तक मज़बूत बना रहे।

*वर्तमान में पदस्थ CID-CB में भी निभा रही हैं अहम भूमिका*

-फील्ड पोस्टिंग के बाद CID-CB में रहते हुए भी आईपीएस ज्येष्ठा मैत्रेई ने खुद को केवल डेस्क ऑफिसर तक सीमित नहीं रखा।

उन्होंने कई संवेदनशील और महत्वपूर्ण मामलों में निर्णायक भूमिका निभाई, जिनमें गहन जांच, इंटर-डिस्ट्रिक्ट कोऑर्डिनेशन और तकनीकी साक्ष्यों के बेहतर इस्तेमाल को प्राथमिकता दी गई। पुलिस विभाग में उनकी पहचान एक ऐसे अधिकारी के रूप में बनी, जो फाइल नहीं, नतीजे देता है।

*IPS की नई लिस्ट में मिल सकता हैं बड़ा दायित्व तय!*

अब जब राजस्थान में आईपीएस अधिकारियों की नई सूची जनवरी क़े लास्ट तक़ आने वाली है, तब यह लगभग तय माना जा रहा है कि *खाकी की शेरनी* को किसी “अच्छे” यानी कानून-व्यवस्था की दृष्टि से महत्वपूर्ण पुर्वोत्तर जिलो की जिम्मेदारी दी जाने की संभावना जताई जा रही हैं ।

वरिष्ठ अधिकारियों का मानना है कि वर्तमान हालात में राज्य को ऐसे अफसरों की ज़रूरत है, जो सख़्ती और संवेदनशीलता—दोनों का संतुलन जानते हो

*“जहां भी तैनाती मिली, वहां अपराधियों ने चैन की नींद नहीं सोई।”*

आईपीएस ज्येष्ठा मैत्रेई उन चुनिंदा अफ़सरों में हैं जिन्होंने यह साबित किया कि अगर नीयत साफ़ हो, रणनीति सटीक हो और नेतृत्व मज़बूत हो—तो अपराध कितना भी संगठित क्यों न हो, टूटता ज़रूर है।

*सिरोही और भिवाड़ी में उनका कार्यकाल आने वाले वर्षों तक “मॉडल पुलिसिंग” के उदाहरण के रूप में याद किया*

Vikas Kumar
Author: Vikas Kumar

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“नशे के सौदागरों पर ANTF ने एकसाथ ऐसा शिकंजा कसा कि चार जिलों में हड़कंप मच गया। जालोर से उदयपुर, कोटा से राजसमंद तक चली ताबड़तोड़ कार्रवाइयों में करोड़ों का मादक पदार्थ जब्त हुआ और तस्करी का संगठित नेटवर्क बेनकाब हो गया।”