जयपुर।
राजस्थान में कानून और लोकतंत्र की हालत पर बड़ा सवाल खड़ा करती एक घटना सेंट्रल जेल जयपुर के सबसे खतरनाक वार्ड-10 से सामने आई है। वर्ष 2023 में मकर संक्रांति के दौरान, जयपुर बमकांड के आतंकवादियों और कुख्यात अपराधियों के बीच एक अधिवक्ता को भी उसी ‘कालकोठरी’ में बंद रखा गया—जहां सामान्य मानवीय गतिविधियां भी अपराध मानी जाती हैं।
ऊँची दीवारों, सख्त निगरानी और पूर्ण प्रतिबंधों वाले इस वार्ड में जब कुछ देर के लिए कैदियों को बाहर निकाला गया, तब बाहर से कटकर आती पतंगों ने एक प्रतीकात्मक दृश्य रचा। सीमित जगह, बिना संसाधन और बिना आज़ादी के, कैदी उन्हीं टूटी डोरियों से पतंग उड़ाने को मजबूर थे।
यह दृश्य सिर्फ एक त्योहार नहीं, बल्कि उस व्यवस्था का आईना था जहां आतंकवादी और एक वकील को एक ही तराजू में तौल दिया गया। सवाल यह है कि क्या राजस्थान में अब कानून की जगह सत्ता-संरक्षित भ्रष्टाचार तय करता है कि कौन अपराधी है और कौन नहीं?
घटना के दौरान जब जेल प्रहरी कैदियों को अंदर भेजने आए, तो एक प्रहरी ने यह कहते हुए कुछ देर की छूट दी—
“अरे, वकील साहब पतंग उड़ा रहे हैं।”
यह टिप्पणी अपने आप में बताती है कि ज़मीनी स्तर पर सच्चाई कुछ और है, लेकिन ऊपर की व्यवस्था कुछ और।
मकर संक्रांति 2026 पर इस घटना को याद करते हुए अधिवक्ता ने खुलकर आरोप लगाया कि झूठे मुकदमों, भ्रष्ट अधिकारियों और न्यायिक संरक्षण के गठजोड़ के चलते उन्हें जेल में डाला गया। उन्होंने कहा कि जिन जजों और अधिकारियों ने प्रत्यक्ष या परोक्ष रूप से ऐसे मामलों को बढ़ावा दिया, उन्होंने लोकतंत्र की जड़ों को कमजोर किया है।
अधिवक्ता ने दावा किया कि आज भी राजस्थान पुलिस के कई सिपाही कानूनी मदद के लिए उनके पास आते हैं, जो यह दर्शाता है कि व्यवस्था के भीतर भी असंतोष गहराता जा रहा है।
उन्होंने चेतावनी दी कि अगर प्रदेश के सवा लाख वकील और आठ करोड़ नागरिक अब भी चुप रहे, तो भ्रष्टाचार आने वाले समय में जनता के मौलिक अधिकारों का गला घोंट देगा।
उन्होंने तीखे शब्दों में कहा—
“आज पतंग कट रही है, कल जनता की सांसें कटेंगी।”
अंत में उन्होंने राजनीतिक और सामाजिक चेतना का आह्वान करते हुए कहा—
“हिन्द की जय सिर्फ नारा नहीं, संघर्ष है। अब सबको एकसाथ खड़ा होना होगा। जय हिंद, जय भारत।”











