मुंबई।
मुंबई महानगरपालिका (BMC) में मेयर चुनाव से पहले सियासी सरगर्मी तेज हो गई है। बहुमत बेहद नाज़ुक होने के कारण किसी भी तरह की टूट-फूट को रोकने के लिए डिप्टी सीएम एकनाथ शिंदे ने बड़ा और सख्त कदम उठाया है। शिंदे गुट के 29 पार्षदों को मुंबई के एक होटल में ठहराया गया है, ताकि मेयर चुनाव में कोई “खेला” न हो सके।
25 साल बाद ठाकरे गुट सत्ता से बाहर
बीएमसी चुनाव में इस बार बड़ा राजनीतिक उलटफेर देखने को मिला है। 25 वर्षों से मुंबई की सत्ता पर काबिज़ ठाकरे गुट को बीजेपी–शिंदे गठबंधन ने बाहर कर दिया है। 227 वार्डों वाले नगर निगम में बहुमत के लिए 114 सीटों की ज़रूरत होती है, जबकि बीजेपी और शिंदे गुट को कुल 118 सीटें मिली हैं। यानी बहुमत सिर्फ चार सीटों का है, जो गठबंधन के लिए चिंता का विषय बना हुआ है।
मेयर चुनाव पर टिकी सबकी निगाहें
सूत्रों के मुताबिक, मेयर चुनाव के दौरान किसी भी तरह की क्रॉस वोटिंग या राजनीतिक सेंधमारी की आशंका को देखते हुए यह कदम उठाया गया है। शिंदे गुट का मानना है कि थोड़ी सी चूक भी पूरे खेल को पलट सकती है। इसी वजह से पार्षदों को एकजुट और सुरक्षित रखने की रणनीति अपनाई गई है।
उद्धव ठाकरे का पलटवार
उधर, शिवसेना (उद्धव गुट) ने भी दावा किया है कि यह जनादेश स्थायी नहीं है और मेयर चुनाव में तस्वीर बदल सकती है। ठाकरे गुट लगातार यह आरोप लगा रहा है कि सत्ता पक्ष दबाव और प्रलोभन की राजनीति कर रहा है।
राजनीतिक संदेश साफ
बीएमसी में बहुमत हासिल करने के बावजूद शिंदे गुट की सतर्कता यह साफ कर रही है कि मुंबई की सत्ता की लड़ाई अभी खत्म नहीं हुई है। मेयर चुनाव तक मुंबई की राजनीति में हर कदम फूंक-फूंककर रखा जा रहा है।











