जयपुर | विशेष रिपोर्ट
नशे की जड़ों पर करारा प्रहार करते हुए राजस्थान पुलिस की ANTF (Anti Narcotics Task Force) ने छह वर्षों से फरार चल रहे 25 हजार रुपये के इनामी अंतरराज्यीय मादक पदार्थ तस्कर भोपाल सिंह को आखिरकार गिरफ्तार कर लिया।
मध्यप्रदेश में अंडरकवर ऑपरेशन के तहत रची गई इस कार्रवाई को “ऑपरेशन भोजराज” नाम दिया गया, जो अब तस्करी के नेटवर्क पर बड़ी चोट बनकर सामने आया है।
गांव में घुसना था नामुमकिन, खेत में बिछा जाल
ANTF की टीम बीते 3–4 दिनों से मध्यप्रदेश में डेरा डाले थी। आरोपी भोपाल सिंह का गांव बड़ा और सहयोगी नेटवर्क वाला होने के कारण वहां सीधे कार्रवाई जोखिम भरी थी।
टीम ने ग्राहक बनकर चाल चली और पैसों की डिलीवरी के बहाने उसे गांव से बाहर खेत में मिलने के लिए राज़ी कर लिया।
तड़के सुबह खेत के आसपास गुप्त घेराबंदी की गई और जैसे ही भोपाल सौदा लेने पहुंचा—
➡️ चारों ओर से घेरकर उसे धर दबोचा गया।
राजस्थान ही नहीं, पंजाब-गुजरात तक फैला था नशे का जाल
जांच में सामने आया कि भोपाल सिंह की पैठ केवल राजस्थान या मध्यप्रदेश तक सीमित नहीं थी।
वह पंजाब और गुजरात तक मादक पदार्थों की सप्लाई में सक्रिय था।
मेवाड़-मारवाड़ के रास्ते नशे की खेप भेजकर वह मोटा मुनाफा कमा रहा था।
कर्ज से अपराध तक की कहानी
पुलिस पूछताछ में भोपाल ने कबूल किया कि
मां की बीमारी
पहली पत्नी की मृत्यु
दूसरी शादी का खर्च
खेती से बढ़ता कर्ज
इन सबके चलते वह पहले छोटे स्तर पर और फिर ड्रग तस्करी के बड़े नेटवर्क में उतर गया।
धीरे-धीरे उसने अवैध कारोबार को अपना पेशा बना लिया।
पिता के नाम की आड़ में अफीम की खेती
भोपाल के पिता के नाम पर वर्षों तक सरकारी अफीम खेती का पट्टा रहा।
इसी की आड़ में चोरी-छिपे अवैध अफीम का उत्पादन और कालाबाजारी होती रही।
जब मुकदमे बढ़े तो सरकार ने पट्टा निरस्त कर दिया, लेकिन तब तक भोपाल अपराध की राह पकड़ चुका था।










