जयपुर/अहमदाबाद।
राजस्थान पुलिस की एंटी नारकोटिक्स टास्क फोर्स (ANTF) ने “ऑपरेशन खैर-दूषण” के तहत एक बड़ी सफलता हासिल करते हुए 27 साल से फरार चल रहे 26 हजार रुपये के इनामी आरोपी को गुजरात के अहमदाबाद से गिरफ्तार कर लिया है। आरोपी की पहचान मनोज उर्फ कुमार (54) निवासी बाड़मेर के रूप में हुई है, जो लंबे समय से नाम, ठिकाना और पेशा बदलकर पुलिस से बचता फिर रहा था।
तीन जिलों में दर्ज हैं मुकदमे
पुलिस के अनुसार आरोपी के खिलाफ बाड़मेर, बालोतरा और जालोर में धोखाधड़ी के कई मामले दर्ज हैं। निवेश के नाम पर लोगों से ठगी कर लाखों रुपये हड़पने के आरोप में वह 1999 से फरार था। उसके खिलाफ इन तीनों जिलों में इनाम भी घोषित किया गया था।
फर्जी कंपनियों के जरिए ठगी का खेल
जांच में सामने आया है कि आरोपी ने 1990 के दशक में एक फर्जी निवेश कंपनी खोलकर लोगों को पैसे डबल करने का लालच दिया। शुरुआत में मुनाफा दिखाकर लोगों का भरोसा जीता और बाद में सैकड़ों निवेशकों का पैसा लेकर फरार हो गया। इस धोखाधड़ी में उसका बड़ा भाई हेमराज भी साझेदार था, जिसकी वर्ष 2021 में मृत्यु हो चुकी है।
पहचान बदलकर जी रहा था नई जिंदगी
फरारी के दौरान आरोपी जयपुर, दिल्ली और फिर अहमदाबाद में शिफ्ट हो गया। यहां उसने अपनी पहचान बदलकर “कुमार ब्रदर्स” के नाम से प्रिंटिंग प्रेस का कारोबार शुरू किया और स्थानीय लोगों से दूरी बनाकर रखी। उसने अपने पुराने रिश्तों से भी संपर्क तोड़ लिया था।
फिल्मी अंदाज में गिरफ्तारी
एएनटीएफ को सूचना मिली थी कि आरोपी अहमदाबाद में अवैध गतिविधियों से जुड़े लोगों के संपर्क में है। टीम ने प्लास्टिक बैनर बनवाने के बहाने उसकी प्रिंटिंग प्रेस पर पहुंचकर जाल बिछाया। कर्मचारियों से बहस के दौरान जब आरोपी खुद सामने आया तो पुलिस ने उसकी पहचान की पुष्टि कर उसे मौके पर ही दबोच लिया।
‘फिल्मों में देखा था ऐसा ऑपरेशन’
गिरफ्तारी के बाद आरोपी ने हैरानी जताते हुए कहा कि उसने इस तरह की पुलिस कार्रवाई सिर्फ फिल्मों में देखी थी। उसने सवाल भी उठाया कि अगर पुलिस इतनी ही सतर्क थी, तो उसे 27 साल तक क्यों नहीं पकड़ा जा सका।
अब खुलेगा धोखाधड़ी का पूरा राज
पुलिस अब आरोपी से पूछताछ कर पुराने मामलों की परतें खोलने में जुटी है। आशंका है कि इस ठगी नेटवर्क में और भी लोग शामिल हो सकते हैं। एएनटीएफ अधिकारियों का कहना है कि जल्द ही और बड़े खुलासे हो सकते हैं।









